झूठ और सांख्यिकी: सर्वेक्षणों की सटीकता पर सवाल
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मूल स्रोत:ynet.co.il
मुख्य निष्कर्ष
- सर्वेक्षणों की सटीकता पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
- सर्वेक्षणकर्ता अपने बचाव के लिए 'वैज्ञानिक' दावों का उपयोग करते हैं।
- बार-बार विफलता मौजूदा मॉडलों में बुनियादी खामियों का संकेत देती है।
- भविष्यवाणी और वास्तविकता के बीच का अंतर स्पष्ट है।
लेख राजनीतिक सर्वेक्षणों के वास्तविकता को सटीक रूप से प्रतिबिंबित करने में लगातार विफल रहने के कारण उत्पन्न निराशा का पता लगाता है। जबकि सर्वेक्षणकर्ता उन्नत कार्यप्रणाली का हवाला देकर अपने काम का बचाव करते हैं, लेखक का तर्क है कि इन भविष्यवाणियों और वास्तविक परिणामों के बीच के आवर्ती अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
अंततः, यह लेख सर्वेक्षण उद्योग के प्रति एक संशयवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह सर्वेक्षण डेटा के अधिकार को चुनौती देता है, यह सुझाव देता है कि जब मॉडल बार-बार विफल होते हैं, तो उनकी वैज्ञानिक निष्पक्षता का दावा जनता की नजर में अपनी विश्वसनीयता खो देता है।
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