ओरोत हाकोदेश - खंड 58 - कल्पना की प्रचुरता
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मूल स्रोत:youtube.com
मुख्य निष्कर्ष
- तौरा का अध्ययन नकारात्मक कल्पना के उभार को रोकता है।
- कल्पना का वाणी और भविष्यवाणियों से गहरा संबंध है।
- रचनात्मक ऊर्जा को प्रकाश के स्रोत में बदला जा सकता है।
रब्बी ज़ीव सुल्तानोविच मानवीय कल्पना के दार्शनिक और आध्यात्मिक आयामों का विश्लेषण करते हुए एक व्याख्यान देते हैं। सत्र में बताया गया है कि कैसे तौरा के अध्ययन और नैतिक कार्यों के माध्यम से रचनात्मक आवेगों को सही दिशा दी जा सकती है, जिससे कल्पना के ज्वार दिव्य प्रकाश में बदल जाते हैं।
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