ट्रम्प ने नेतन्याहू की चुनावी पलटवार का श्रेय अपने समर्थन को दिया
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मूल स्रोत:kikar.co.il
मुख्य निष्कर्ष
- डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि उनके समर्थन ने नेतन्याहू को करारी हार से बचाया।
- अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों के बाद जनमत के रुझानों में नाटकीय बदलाव देखा गया।
- टेक्सास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया।
वैश्विक राजनीति में अमेरिका और इजराइल के बीच के संबंध हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं, खासकर जब बात चुनावी परिणामों की हो। हाल ही में इजराइल में आए चुनाव परिणामों और रुझानों के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया कि उनकी स्पष्ट घोषणाओं के कारण ही चुनावी गणित में नाटकीय बदलाव आया। ट्रम्प के अनुसार, शुरुआती संकेत नेतन्याहू के लिए भारी हार की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन उनके समर्थन ने इस पूरे परिदृश्य को उलट दिया और एक बेहद करीबी मुकाबला या संभावित जीत की स्थिति बना दी।
विदेशी नेताओं द्वारा घरेलू चुनावों में इस प्रकार के हस्तक्षेप पर विश्लेषकों के बीच अक्सर बहस होती है, लेकिन दोनों देशों के बीच की रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में इस तरह के बयान खासा प्रभाव डालते हैं। ट्रम्प ने अपने इस कदम को क्षेत्रीय स्थिरता और एक प्रमुख सहयोगी देश के पक्ष में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे एक कथित हार की संभावना को उनकी कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घोषणा ने एक प्रतिस्पर्धात्मक मुकाबले में बदल दिया।
चुनावी समीकरणों के अलावा, मध्य पूर्व में अमेरिकी विदेश नीति का एक अन्य मुख्य केंद्र ईरान का खतरा बना हुआ है। टेक्सास में मीडिया से मुखातिब होते हुए, ट्रम्प ने तेहरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को कमजोर करने वाले अपने पिछले कदमों का जिक्र किया। जब उनसे सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि क्या अमेरिका इस तनावपूर्ण माहौल में किसी नए सैन्य हमले पर विचार कर रहा है, तो उन्होंने कोई स्पष्ट भविष्यवाणी करने से बचते हुए यह संकेत दिया कि कोई भी विकल्प पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है और सब कुछ संभव है।
घरेलू चुनावी राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के इन दोहरे पहलुओं से यह स्पष्ट होता है कि वाशिंगटन और यरुशलम के बीच के निर्णय किस प्रकार एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जैसे-जैसे इजराइल में अंतिम आंकड़े स्पष्ट होंगे और नई सरकारों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, इन बयानों के कूटनीतिक निहितार्थ दोनों देशों की रणनीतियों को लंबे समय तक प्रभावित करते रहेंगे।
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