त्साची हानेग्बी का लिकुड से किनारा, लिबरमैन को समर्थन
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मूल स्रोत:inn.co.il
मुख्य निष्कर्ष
- त्साची हानेग्बी ने पहली बार लिकुड पार्टी को वोट न देने का फैसला किया।
- उन्होंने 'इजराइल बेयतेनु' के नेता अवित्डोर लिबरमैन का समर्थन किया।
- सैन्य छूट, अपराध नियंत्रण और न्यायपालिका से जुड़े मतभेदों को वजह बताया।
इजराइल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है जब लिकुड पार्टी के वरिष्ठ नेता त्साची हानेग्बी ने पार्टी से अपना समर्थन वापस ले लिया। हानेग्बी ने लंबे समय तक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख के रूप में कार्य किया है और नेतन्याहू सरकारों में कई मंत्री पद संभाले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार लिकुड पार्टी को वोट नहीं देंगे, बल्कि अवित्डोर लिबरमैन का समर्थन करेंगे।
अपने एक लेख में हानेग्बी ने इस फैसले के पीछे के कारणों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन की वर्तमान नीतियां देश के बुनियादी सुरक्षा और शासन सिद्धांतों से भटक गई हैं। उन्होंने अति-रूढ़िवादी नागरिकों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट, राष्ट्रवादी अपराधों पर ढिलाई और न्यायपालिका के प्रति सरकार के आक्रामक रुख पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
हानेग्बी का यह कदम इजराइली राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। दशकों तक लिकुड के प्रमुख स्तंभ रहे हानेग्बी का लिबरमैन के साथ जाना सही मायने में दक्षिणपंथी राजनीति के भीतर मतभेदों को दर्शाता है। लिबरमैन लंबे समय से सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा और धर्मनिरपेक्ष दक्षिणपंथी शासन की वकालत करते रहे हैं।
इस घोषणा से लिबरमैन की राजनीतिक स्थिति को मजबूती मिलने की संभावना है। यह कदम यह भी दर्शाता है कि आगामी चुनावों में सैन्य सेवा में समानता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे मतदाताओं के बीच मुख्य चर्चा का विषय बने रहेंगे।
🤔 विचार करने योग्य बिंदु
- क्या हानेग्बी के इस कदम से लिकुड के पारंपरिक मतदाता लिबरमैन की ओर रुख करेंगे?
- इजराइल में अनिवार्य सैन्य सेवा के मुद्दे पर इस फैसले का क्या प्रभाव पड़ेगा?
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
›त्साची हानेग्बी कौन हैं?
वे इजराइल के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व प्रमुख हैं।
›हानेग्बी ने लिबरमैन का समर्थन क्यों किया?
उन्होंने सैन्य भर्ती छूट और न्यायपालिका से जुड़ी नीतियों पर लिकुड से असहमति के कारण यह फैसला लिया।
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