नेतनयाहू ने अति रूढ़िवादी ड्राफ्ट गिरफ्तारियों की निंदा की और छूट कानून का संकेत दिया
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मूल स्रोत:ynet.co.il
मुख्य निष्कर्ष
- अमेरिका से लौटे चाबाद समुदाय के 40 से अधिक युवाओं को बेन-गुरियन हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया।
- प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने गिरफ्तारियों को अस्वीकार्य और स्वैच्छिक एकीकरण के खिलाफ बताया।
- नेतनयाहू ने नई सरकार के गठन से पहले सैन्य छूट कानून आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।
- विपक्षी नेताओं ने इस बयान की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक स्वार्थ के लिए सैन्य समानता से समझौता बताया।
इजरायल में सैन्य सेवा की अनिवार्यता और धार्मिक राजनीतिक दलों की मांगों के बीच का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई एक नाटकीय घटना है। चाबाद आंदोलन के न्यूयॉर्क स्थित वैश्विक केंद्र में एक वर्ष अध्ययन करने के बाद इजरायल लौटे चालीस से अधिक युवा हसिदिक छात्रों को अधिकारियों ने उतरते ही रोक लिया। सैन्य भर्ती केंद्रों में रिपोर्ट न करने के कारण उन्हें भगोड़ा माना गया था। हालांकि समूह को शुरुआत में लगा कि सैन्य पुलिस इतने बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में नहीं ले पाएगी, लेकिन सुरक्षा बलों ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनकी यात्रा का प्रबंध किया, जिससे विरोध प्रदर्शनों की आशंका बढ़ गई।
घटना के तुरंत बाद दिए गए एक रेडियो साक्षात्कार में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने इन दंडात्मक उपायों से खुद को अलग करते हुए कहा कि ऐसे कदम अस्वीकार्य हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ये गिरफ्तारियां जबरदस्ती के बजाय सहयोग के माध्यम से अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदायों को सेना में एकीकृत करने के प्रयासों को कमजोर करती हैं। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो लोग पूर्णकालिक अध्ययन नहीं कर रहे हैं, उन्हें सेना में भर्ती होना चाहिए, साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तौरा (Torah) के अध्ययन की रक्षा करना यहूदी इतिहास के लिए कितना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, नेतनयाहू ने पर्याप्त राजनीतिक सद्भावना होने पर नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले छूट कानून लागू करने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
प्रधानमंत्री के इन बयानों पर विपक्षी नेताओं ने तत्काल और तीखा हमला किया। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने इन टिप्पणियों को अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए सैन्य समानता का सौदा करने के रूप में चित्रित किया। आलोचकों ने चेतावनी दी कि हजारों योग्य युवाओं को सैन्य सेवा से छूट देने से सक्रिय सैनिकों और रिजर्व बलों का मनोबल गिरेगा, जो देश की रक्षा का मुख्य भार उठाते हैं। जैसे-जैसे चुनावी माहौल गर्म हो रहा है, अनिवार्य सैन्य सेवा और राजनीतिक गठजोड़ के बीच का यह संघर्ष जनता के बीच मुख्य चर्चा का विषय बना हुआ है।
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