नातान एशेल ने छोटे दक्षिणपंथी उम्मीदवारों पर तीखा हमला बोला
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मूल स्रोत:inn.co.il
मुख्य निष्कर्ष
- नातान एशेल ने चुनावी थ्रेशोल्ड पार न कर पाने वाले दक्षिणपंथी उम्मीदवारों पर हमला बोला।
- उन्होंने कहा कि बिना संभावना वाले उम्मीदवार महत्वपूर्ण वोटों को बर्बाद कर रहे हैं।
- चुनावी सीमा पार न करने वाली पार्टियों को मिले वोट संसद में सीटों में नहीं बदलते।
- प्रमुख दल वोटों के बिखराव को रोकने के लिए रणनीतिक मतदान की अपील कर रहे हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक प्रमुख सहयोगी ने उन दक्षिणपंथी नेताओं पर निशाना साधा है, जिनकी उम्मीदवारी से रूढ़िवादी वोट बैंक के बंटने का खतरा है। नातान एशेल ने सार्वजनिक रूप से उन छोटी पार्टियों के नेताओं की आलोचना की, जो चुनावी सीमा पार करने की संभावना न होने के बावजूद चुनावी मैदान में बने हुए हैं।
अपने बयान में एशेल ने कहा कि दक्षिणपंथ का कोई भी उम्मीदवार जिसके पास संसदीय सीमा पार करने की वास्तविक संभावना नहीं है, वह पूरे राजनीतिक धड़े को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी नेता का पिछला रिकॉर्ड कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, ऐसी परिस्थितियों में चुनाव लड़ना अदूरदर्शिता या गलत मंशा को दर्शाता है। उनका यह बयान बड़ी पार्टियों के भीतर बढ़ती निराशा को उजागर करता है।
इजरायल की चुनावी प्रणाली में संसद में सीटें पाने के लिए न्यूनतम वोट प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य होता है। जो पार्टियां इस सीमा को पार करने में विफल रहती हैं, उन्हें मिले वोट पूरी तरह से बेकार चले जाते हैं। पिछले चुनावों में भी छोटी पार्टियों के कारण दक्षिणपंथी गुट के हजारों वोट खराब हुए थे।
इजरायल में चुनाव के समय बेकार वोटों पर बहस एक आवर्ती मुद्दा बन गई है। मतदान की तारीख नजदीक आते ही प्रमुख राजनीतिक दल रणनीतिक मतदान पर जोर देने लगते हैं और मतदाताओं से अपील करते हैं कि वे अपना वोट बेकार न जाने दें।
एशेल के कड़े रुख से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी रणनीतिकार वोटों के विभाजन को लेकर चिंतित हैं। इस तरह की तीखी टिप्पणियों का उद्देश्य छोटे उम्मीदवारों पर नाम वापस लेने का दबाव बनाना या मतदाताओं को व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना है।
निष्कर्ष के रूप में, छोटी पार्टियों को लेकर यह विवाद इजरायल की जटिल चुनावी रणनीति को रेखांकित करता है। जब तक छोटे दल बिना किसी ठोस जनाधार के चुनाव लड़ते रहेंगे, तब तक व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और दलीय गठबंधनों के बीच तनाव बना रहेगा।
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