रिपोर्ट: लिबरमैन सरकार बनाने का प्रयास करेंगे
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मूल स्रोत:srugim.co.il
मुख्य निष्कर्ष
- एविग्डोर लिबरमैन सरकार बनाने के लिए जनादेश मांगने की तैयारी कर रहे हैं।
- गादी आइज़ेनकोट की गठबंधन बनाने की क्षमता पर संदेह।
- नेतन्याहू ने चेतावनी दी: नेसेट अध्यक्ष को बदलना एकता सरकार की बातचीत को खत्म कर देगा।
- विपक्ष संसदीय रणनीति पर विभाजित है।
इजरायली राजनीतिक परिदृश्य वर्तमान में काफी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 'यिसरायल बेतेनु' पार्टी के अध्यक्ष एविग्डोर लिबरमैन खुद सरकार बनाने के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह घटनाक्रम 'परिवर्तन ब्लॉक' के भीतर उस बढ़ती शंका के बीच आया है कि 'यशर' पार्टी के नेता गादी आइज़ेनकोट गठबंधन बनाने की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर पाएंगे या नहीं।
राजनीतिक संवाददाता नादाव एलीमेलेक ने बताया है कि विपक्ष के कई गुटों के बीच प्रक्रियात्मक बदलावों को आगे बढ़ाने के लिए आम सहमति बन रही है, जिसमें नेसेट के नए अध्यक्ष का चुनाव शामिल है। हालांकि, इन प्रयासों को कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि संसद के लिए उन कानूनों को पारित करना मुश्किल है जो सीधे तौर पर सरकार गठन से संबंधित नहीं हैं। लिबरमैन, अपनी ओर से, एक अलग रुख बनाए हुए हैं, जो विपक्ष के भीतर ही मौजूद गहरे मतभेदों को उजागर करता है।
इन युद्धाभ्यासों के जवाब में, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सख्त रुख अपनाया है। लिकुड पार्टी के सदस्यों के साथ निजी बातचीत में, नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि विपक्ष और अरब गुट अपने बहुमत का उपयोग वर्तमान नेसेट अध्यक्ष अमीर ओहाना को हटाने के लिए करते हैं, तो यह एक 'रेड लाइन' होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा कदम एकता सरकार की किसी भी संभावना के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर देगा।
यह स्थिति इजरायली समाज के गहरे ध्रुवीकरण और खंडित संसदीय प्रणाली में समझौते तक पहुंचने की कठिनाई को दर्शाती है। जैसे-जैसे देश राष्ट्रपति आवास से अगले कदमों का इंतजार कर रहा है, नए चुनावों का खतरा राजनीतिक भविष्य पर मंडरा रहा है। दबाव में बातचीत करने की राजनीतिक नेताओं की क्षमता आने वाले दिनों में इजरायली सरकार के भविष्य को परिभाषित करने के लिए निर्णायक होगी।
कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं, क्योंकि हर पक्ष अपने विरोधियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। जहां विपक्ष अपनी संसदीय ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं मौजूदा सरकार ने स्पष्ट सीमाएं तय कर दी हैं। आने वाले दिन यह तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि लिबरमैन के कदम राजनीतिक सफलता की ओर ले जाएंगे या मौजूदा संकट को और गहरा करेंगे।
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