इजरायल में इंडियाना जोन्स? जर्मन सोने के खजाने का रहस्य
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मूल स्रोत:ynet.co.il
मुख्य निष्कर्ष
- एक किसान ने 1918 के जर्मन खजाने का नक्शा होने का दावा किया।
- शिमोन पेरेस ने 1960 के दशक में दस्तावेजों की जांच की थी।
- क्षेत्र में सोने के कई गुप्त स्थानों के सिद्धांत मौजूद हैं।
- खजाना आधिकारिक तौर पर कभी नहीं मिला।
कहानी की शुरुआत मोशे स्कशिडेलक से हुई, जिन्होंने विस्थापितों के शिविर में एक जर्मन अधिकारी से प्राप्त दस्तावेज पेश किए। अधिकारी ने बताया कि 1918 में नासरत से जर्मन सेना की वापसी के दौरान, उन्होंने रिश्वत के लिए रखे गए सोने के चार बक्से दफन कर दिए थे। ब्रिटिश सेना के साथ झड़प के बाद, यह रहस्य तब तक सुरक्षित रहा जब तक स्कशिडेलक इजरायल नहीं आए।
स्कशिडेलक ने सरकार को खजाने में रुचि लेने के लिए मनाने की कोशिश की और तत्कालीन रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक शिमोन पेरेस से मुलाकात की। खजाने के बंटवारे पर बातचीत विफल रही और नक्शा एक दराज में ही रह गया। वर्षों बाद, अन्य शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि क्षेत्र में कई खजाने छिपे हो सकते हैं, जिससे यह मिथक और गहरा गया।
इस मामले का विश्लेषण यह दर्शाता है कि कैसे खोए हुए खजाने की कहानियां राष्ट्रीय इतिहास के साथ जुड़ जाती हैं। यह किंवदंती मानव स्वभाव की अतीत के रहस्यों को जानने की उत्सुकता को दर्शाती है। हालांकि खजाना कभी आधिकारिक रूप से नहीं मिला, लेकिन यह स्थानीय इतिहास का एक दिलचस्प हिस्सा बना हुआ है।
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